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व्यावसायिक संरचना के निर्धारक कारक

व्यावसायिक संरचना के निर्धारक कारक

व्यावसायिक संरचना के निर्धारक कारक

किसी देश की व्यावसायिक संरचना कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करती है. जिनमें उत्पादन शक्तियों का विकास, विशिष्टीकरण, प्रतिव्यक्ति आय का स्तर तथा प्राकृतिक साधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है.

1. भौगोलिक कारक :

औद्योगिक क्रान्ति से पूर्व व्यावसायिक संरचना के निर्धारण में यूरोप में भौगोलिक कारक अत्यन्त महत्वपूर्ण हुआ करते थे. लेकिन औद्योगिक क्रान्ति के फलस्वरूप जब ऊर्जा के नए स्रोत ज्ञात हुए, नई-नई औद्योगिक मशीनों का आविष्कार हुआ तो भौगोलिक कारकों का सापेक्षिक महत्व कम होने लगा. परन्तु भारत और अन्य अल्प-विकसित देशों के सन्दर्भ में ये कारक अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और लोगों के व्यवसाय का निर्धारण अक्सर प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धि द्वारा होता है.

2. उत्पादक शक्तियों का विकास :

किसी भी देश की व्यावसायिक संरचना बहुत हद तक उत्पादक शक्तियों के विकास पर निर्भर करती है. जब तक उत्पादक शक्तियों का विकास नहीं होता और नई औद्योगिक तकनीकों का पता नहीं लगता श्रम उत्पादकता कम रहती है और जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग खाद्य पदार्थों के उत्पादन में लगा रहता है. भारत सहित अधिकतर अल्प-विकसित देशों की यही समस्या है.

3. श्रम-विभाजन तथा विशिष्टीकरण :

उत्पादक शक्तियों का निरन्तर विकास श्रम-विभाजन व विशिष्टीकरण के लिए नई-नई राहें खोलता चला जाता है. श्रम-विभाजन न होने पर लोगों के पास इसके सिवा और कोई विकल्प नहीं होता है कि वे प्राथमिक क्रियाओं में ही लगे रहें. परन्तु श्रम-विभाजन होने पर श्रम की उत्पादकता तेजी से बढ़ती है और प्राथमिक क्षेत्र में द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों की ओर श्रम का गमन होने लगता है.

4. प्रति व्यक्ति आय का स्तर :

किसी देश का प्रतिव्यक्ति आय का स्तर (जो उसके विकास के स्तर का द्योतक है) जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना पर काफी प्रभाव डालता है. प्रत्येक देश में जहां प्रतिव्यक्ति आय का स्तर नीचा है, राष्ट्रीय आय का एक काफी बड़ा हिस्सा प्राथमिक क्षेत्र के उत्पादन पर ही खर्च कर दिया जाता है. आर्थिक विकास होने पर जब प्रतिव्यक्ति आय स्तर में वृद्धि होती है तो औद्योगिक वस्तुओं की मांग बढ़ती हैं तथा औद्योगिक उत्पादन बढ़ता है और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं. | भारत सहित कई अल्पविकसित देशों की प्रतिव्यक्ति आय विश्व के निम्नतम स्तरों से तुलनीय है. इन परिस्थितियों में स्वाभाविक है कि यहां औद्योगिक वस्तुओं का बाजार सीमित है और कार्यकारी जनसंख्या का मात्र 13 प्रतिशत भाग ही द्वितीयक क्षेत्र में लगा हुआ है. जबकि विकसित देशों में यही प्रतिशत 40 से 50 तक है.

 

व्यावसायिक संरचना और शहरीकरण (Occupational Structure and Urbanisation)

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